राजस्थान एसआईआर:कैसा गड़बड़-घोटाला; डोटासरा क्यों बोले-बीजेपी ने रातोंरात फर्जी फार्म जमा करवाए ? - Bjp Accused Of Voter List Manipulation And Data Mining, Congress Demands Action
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बीजेपी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। डोटासरा ने कहा कि बीजेपी ने 14 जनवरी को रातोंरात फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए नाम जोड़ने और हटाने के हजारों फार्म एसडीओ कार्यालयों में जमा करवा दिए। इन फार्मों पर न तो बीएलओ के हस्ताक्षर हैं और न ही मोबाइल नंबर दर्ज हैं। उन्होंने दावा किया कि हर विधानसभा में एक हजार से लेकर सात हजार तक फार्म अचानक पहुंचाए गए, जो सीधे बीजेपी कार्यालय से भरवाए गए थे।
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डोटासरा ने कहा कि नियमों के अनुसार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद बीएलओ और बीएलए एक दिन में अधिकतम 10 फार्म ही जमा कर सकते हैं, जिनका पूरा विवरण चुनाव आयोग के पोर्टल पर दर्ज होता है। ऐसे में सवाल है कि बीजेपी ने एक ही दिन में हजारों फार्म किस नियम के तहत जमा करवाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता एसडीओ और बीएलओ पर दबाव बना रहे हैं और धमकी दे रहे हैं कि यदि फार्म स्वीकार नहीं किए गए तो तबादले और सर्विस खराब कर दी जाएगी।
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डोटासरा ने कहा कि अमित शाह और बीएल संतोष के जयपुर दौरे के बाद बीजेपी ने अपने मंत्रियों और नेताओं को कांग्रेस समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का टास्क दिया है। सीएमआर से पेन ड्राइव के जरिए डेटा दिया गया और पहले से प्रिंटेड फार्म तैयार कर सीधे एसडीओ कार्यालयों में जमा करवाए गए। एक बूथ पर 50-50 नाम जोड़ने और कांग्रेस समर्थित वोटरों के नाम काटने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी डेटा माइनिंग के जरिए तानाशाही रवैया अपना रही है। सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों, सोशल मीडिया पर सवाल उठाने वालों और आंदोलनों से जुड़े लोगों का विधानसभा-वार डेटा तैयार कर उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश रची जा रही है। डोटासरा ने कहा कि कई अधिकारी इस दबाव से परेशान हैं और खुद स्वीकार कर रहे हैं कि नियमों के तहत ही जांच के बाद नाम जोड़े या हटाए जाएंगे।
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डोटासरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों और बीजेपी के दबाव में काम करने वालों को कांग्रेस छोड़ेगी नहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब बीएलओ से जबरन ओटीपी लेकर नाम जोड़ने और हटाने की कोशिश की जा रही है, जो सबसे गंभीर मामला है। अंत में डोटासरा ने चुनाव आयोग से मांग की कि 14 और 15 जनवरी को नाम जोड़ने और हटाने के लिए आए सभी फार्मों का डेटा सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।